Wednesday, 17 October 2018

ग्राउंड रिपोर्ट: पलवल मस्जिद की पाकिस्तान से फ़ंडिंग का सच

दिल्ली से दो घंटे की दूरी पर उतावड़ मेवाती मुसलमानों का एक पिछड़ा गाँव है जहाँ सोमवार को दर्ज़नों मीडिया वाले आ धमके. फ़ोकस में थी एक मस्जिद जो बाहर से जितनी छोटी और अधूरी थी अंदर से उतनी ही बड़ी और सुंदर.
खुलफ़ए राशिदीन मस्जिद इतनी बड़ी है कि आस पास के गावों के 15 हज़ार मुसलमान एक साथ अंदर नमाज़ अदा कर सकते हैं. लेकिन मैं जब वहां पहुंचा तो मस्जिद काफ़ी खाली थी. छोटी बच्चियां और बच्चे क़ुरान पढ़ते ज़रूर नज़र आए. मुझसे कहा गया कि ये मस्जिद भी है और मदरसा भी.
इन दिनों यह मस्जिद सुर्ख़ियों में है. राष्ट्रीय जाँच एजेंसी या एनआइए का इल्ज़ाम है कि मस्जिद के इमाम मोहम्मद सलमान ने पाकिस्तान के हाफ़िज़ सईद (जमात उद दावा प्रमुख) की संस्था से पैसे लेकर मस्जिद बनाई है. इस मामले में पुलिस से बात करने की कोशिश की तो कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. पुलिस का कहना है कि एनआईए ही इस बारे में जानकारी देगी. इमाम सलमान पिछले महीने गिरफ़्तार कर लिए गए. उनके साथ दो और लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. लेकिन गाँव के अधिकतर लोग इमाम सलमान पर लगे इल्ज़ाम को ग़लत मानते हैं.
मस्जिद का निर्माण 1998 में शुरू हुआ था और इसका उद्घाटन 2010 में हुआ. मुझे बताया गया कि अब तक इस पर 2 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं.
निर्माण के समय से मस्जिद से जुड़े आस मुहम्मद नामी एक बुज़ुर्ग बोले, "सलमान के पिता एक बड़े धर्मगुरु थे जिनकी पहचान दुनिया भर में थी और उनमें से कुछ उन्हें मस्जिद की तामीर के लिए पैसे भेजते थे. मगर मस्जिद बनी है स्थानीय लोगों के चंदे से."
आस मुहम्मद कहते हैं कि उन्हें ये नहीं जानकारी है कि कौन से देश से कौन से लोग, कितने पैसे भेजा करते थे.
आस मुहम्मद और वहां मौजूद लोगों ने हमें समझाने की कोशिश की कि मदरसों और मस्जिदों के लिए मुस्लिम मुल्कों में चंदा माँगना आम बात है.
पिछले हफ़्ते एनआईए की टीम को मस्जिद का दौरा करवाने वाले मुहम्मद इरशाद ने कहा कि पाकिस्तान से या पाकिस्तानी संस्था से चंदा नहीं आता.
लखु नाम के एक बगल के गाँव के सरपंच के मुताबिक़, "हाफिज सईद तो एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी है उससे पैसे कौन लेना चाहेगा."
मोहम्मद इरशाद ने कहा कि मस्जिद को स्थानीय हिंदुओं ने भी चंदा दिया है "कई हिंदुओं ने बिल्डिंग मटीरियल देकर इसकी मदद की है."
सरपंच लखु ने मस्जिद के बाहर खड़े होकर उसकी तरफ़ इशारा करके कहा कि अगर पाकिस्तान या किसी और देश से पैसे आते तो मस्जिद की तामीर अब तक पूरी नहीं हो जाती? मस्जिद का बाहरी हिस्सा कई जगहों पर अधूरा है.
दर्जनों मीडिया वालों की उपस्थिति में वहां के मुसलमानों के चेहरों पर सवालिया निशान थे. कुछ ने बार-बार ये पूछा, "आज आप लोग क्यों आए हैं?" गांव वालों के हिसाब से इमाम सलमान की गिरफ़्तारी पिछले महीने हुई थी.
इमाम सलमान के पक्ष में सभी बोल रहे थे. झुंड में खड़े बुजुर्ग नसरू ने एक दस्तावेज़ हवा में लहराकर कहा कि ''मैंने मस्जिद में पैसे कम पड़ जाने के बाद अपनी ज़मीन बेच दी और मस्जिद के निर्माण में लगा दी. ये देखिए इस दस्तावेज़ को. सलमान की बिकी ज़मीन का ये दस्तावेज़ है."
लेकिन जो लोग सर्वसम्मति से कह रहे थे उसे मोहम्मद इरशाद ने शब्दों में इस तरह से पिरोया, "मस्जिद एक इस्लामी मरकज़ भी है जिसे पास के 84 गांवों की मदद से बनाया गया है. इसकी पूरी ज़मीन 10 एकड़ है जो पंचायत ने दान की थी. लेकिन 100 के क़रीब परिवारों और दुकानदारों ने ज़मीन के एक बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा कर कर रखा है. इनकी क़ीमत करोड़ों में है. हम इन्हें यहाँ से हटाना चाहते हैं. इन लोगों ने हम पर मुक़दमा कर दिया है और हमें बदनाम करने के लिए इमाम सलमान और मस्जिद के ख़िलाफ़ बयान दिया है."स्जिद के बाहर दिल्ली जाने वाली सड़क पर लगातार कई दुकानें हैं जिनके मालिकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने सलमान और उनके साथियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा ज़रूर किया है, लेकिन एनआइए से उनके बारे में कुछ नहीं कहा. उनकी दुकानें और मकान मस्जिद बनने से पहले से ही है.''
नसरु नाम के एक दुकानदार ने कहा, "एनआईटी (उनका मतलब था एनआईए) का नाम हमने कभी सुना भी नहीं है. हम उनसे कभी मिले भी नहीं."

Monday, 1 October 2018

डॉलर के मुक़ाबले थरथर कांप रहा रुपया, ये है वजहें

विमानन मुद्दों पर सलाह देने वाले समूह सीएपीए
इंफ़ीबीम के शेयर में ऐसी उठापटक पहली बार हुई हो, ऐसा नहीं है. दिल्ली स्थित एक रिसर्च फ़र्म में रिसर्च एनालिस्ट आसिफ़ इकबाल कहते हैं, "साल 2016 में कंपनी का आईपीओ लाने के बाद कंपनी शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने वाली पहली ई-कॉमर्स कंपनी बनी थी. तब कंपनी ने आईपीओ के ज़रिये 450 करोड़ रुपये जुटाए थे. आईपीओ को लेकर निवेशकों में बहुत अधिक उत्साह भी देखने को नहीं मिला था और ये 110 फ़ीसदी ही सब्सक्राइब हो पाया था."
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक 9 नवंबर 2016 को कंपनी के शेयर में कारोबारी सत्र के दौरान 17.48 फ़ीसदी की गिरावट आई थी, हालाँकि कारोबार खत्म होने तक शेयर में रिकवरी आई और ये आखिर में ये गिरावट महज ढाई फ़ीसदी की रही. 27 मार्च 2017 को शेयर में इंट्राडे गिरावट तकरीबन 20 फ़ीसदी की थी, इसीके चार दिन बाद 31 मार्च 2017 को शेयर फिर से कारोबारी सत्र में 20 फ़ीसदी टूटा. 25 सितंबर को जब शेयर का भाव 119 रुपये पर था, तब भी कंपनी का शेयर अचानक 39.5 फ़ीसदी गिर गया. इसी साल 29 दिसंबर को इसमें फिर से 40 फ़ीसदी की गिरावट आई. 21 सितंबर 2018 को शेयर ने फिर 41 फ़ीसदी का गोता लगा दिया.
आम तौर पर शेयरों में तेज़ गिरावट रोकने के लिए सर्किट लिमिट तय होती हैं, मसलन 5 फ़ीसदी, 10 फ़ीसदी और सबसे अधिक 20 फ़ीसदी. लेकिन इंफ़ीबीम के शेयर में क्योंकि वायदा कारोबार की भी इजाज़त है, इसलिए इस पर सर्किट लिमिट लागू नहीं होती है.
आसिफ़ इक़बाल कहते हैं, "स्टॉक एक्सचेंजों को ध्यान देना चाहिए कि वे अच्छी क्वालिटी के स्टॉक्स में ही डेरिवेटिव यानी वायदा कारोबार की श्रेणी में रखे. वरना इसका ख़ामियाजा ग़लत खबर या अफ़वाह उड़ने की स्थिति में सीधे-सीधे आम निवेशकों को पहुँचता है."
इंफीबीम सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सर्विसेज़, मेंटिनेंस, वेब डेवलपमेंट, ई-कॉमर्स जैसे कारोबार में है. कंपनी का मुख्य कारोबार अपने उत्पादों को बेचना, सॉफ्टवेयर की बिक्री और ऑनलाइन उत्पादों की बिक्री है. इसके अलावा कंपनी डोमेन नेम रजिस्ट्री का काम भी करती है.
अहमदाबाद स्थित इस कंपनी ने इसी साल जून में दावा किया था कि उसने एक दिन में 40 हज़ार से अधिक डोमेन नेम रिजस्टर किए हैं.
के दक्षिण एशिया निदेशक विनीत सोमैया कहते हैं, "2030 तक भारत के सभी छह बड़े शहरों को दूसरे हवाईअड्डे की ज़रूरत होगी. तब तक शायद मुंबई को तीसरे हवाईअड्डे की ज़रूरत पड़ जाए."
"और वास्तव में भारत के अन्य बड़े शहरों में सभी मौजूद 40 बड़े हवाईअड्डे भी अपनी पूरी क्षमता में चल रहे होंगे और उनकी क्षमता को और बढ़ाने की ज़रूरत होगी."
इस साल की शुरुआत में आई सीएपीए की एक रिपोर्ट में ये अनुमान लगाया गया है कि "2022 तक भारत की हवाईअड्डों की व्यवस्था अपने बुनियादी क्षमता से अधिक का भार संभाल रही होगी."
हालांकि इस रिपोर्ट के अनुसार, "2016 के बाद से एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए पुनरुद्धार के काम ने तेज़ी पकड़ी है."
नए हवाईअड्डे बनाने की योजना के साथ-साथ मौजूदा हवाईअड्डों का विस्तार करने और इनके लिए धन की व्यवस्था करने के नई तरीकों को भी विकसित किया जा रहा है.
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में एक और बवंडर आया. देश की पहली लिस्टेड ई-कॉमर्स कंपनी इंफ़ीबीम का शेयर ऐसा लुढ़का कि साढ़े तीन बज़े जब शेयर बाज़ार बंद हुआ तो एक ही कारोबारी सत्र में कंपनी के निवेशकों के तकरीबन 9200 करोड़ रुपये लुट चुके थे.
7 जनवरी 2009 को सत्यम कंप्यूटर्स के बाद एक कारोबारी सत्र में किसी भी शेयर में ये दूसरी सबसे तेज़ गिरावट थी. इंफ़ीबीम का शेयर 73 फ़ीसदी तक टूटा और कारोबार खत्म होने पर 70.24 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.
इससे पहले, खातों में गड़बड़ी के घोटाले के पता चलने पर हैदराबाद की आईटी कंपनी सत्यम का शेयर एक दिन में 83 फ़ीसदी लुढ़का था.
शनिवार को इंफ़ीबीम की सालाना आम बैठक यानी एजीएम थी और इससे ठीक एक दिन पहले निवेशकों में एक अफ़वाह से ऐसी अफ़रातफ़री मची कि गुरुवार को 197 रुपये पर खड़ा कंपनी का शेयर 59 रुपये पर आ गया.
गुरुवार को जहाँ कंपनी की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन यानी बाज़ार पूँजी 13,105 करोड़ रुपये थे, वो 24 घंटे बाद ही 3,900 करोड़ रुपये के आस-पास आ गई.
कहा तो ये भी जा रहा है कि एक व्हाट्सऐप मैसेज ने निवेशकों में हड़कंप मचा दिया. ब्रोकरेज फर्म इंडिया इंफोलाइन में काम कर रहे एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गुरुवार की शाम से ही व्हाट्सऐप मैसेज सर्कुलेट हो रहा था, जिसमें कहा गया था कि कंपनी के गवर्नेंस से जुड़ी कुछ गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं.
हालाँकि बाद में कंपनी ने एक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया कि उसने अपनी सब्सिडियरी कंपनी एनएसआई इंफ़ीबीम ग्लोबल को ब्याजमुक्त कर्ज़ दिया है, लेकिन ये छोटी अवधि का कर्ज़ है और ये सिर्फ़ कंपनी अपने कारोबार और कामकाज पर खर्च कर रही है. कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को ये भी जानकारी दी कि 31 मार्च 2018 तक एनएसआई इंफ़ीबीम पर उसका कर्ज़ 135 करोड़ रुपये था.