कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश राव ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीज़ल के दाम घटाने का फैसला किया है.
ये हमारी तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन का तोहफा है. हम
उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि अगर राज्य सरकार पेट्रोल-डी
साफ है कि महंगे दाम से जूझ रही जनता के लिए ये ऐलान
काफी राहत दे सकता है. बता दें कि सोमवार को भी राजधानी दिल्ली में
पेट्रोल-डीज़ल के दाम में बढ़ोतरी हुई.
सोमवार को पेट्रोल 15 पैसे बढ़कर 82.06 और डीजल 6 पैसे बढ़कर 73.78 रुपये हुआ. मुंबई में सोमवार को पेट्रोल 89.44 रुपए प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. इसके अलावा डीजल की कीमत 78.33 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है.
कई अन्य राज्यों ने भी दी है राहत
कर्नाटक से पहले भी कई राज्यों ने जनता को राहत देने का
ऐलान किया है. पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार ने भी पेट्रोल-डीज़ल के दाम में एक रुपए की कटौती करने का ऐलान किया था. आंध्र प्रदेश की सरकार
ने भी पेट्रोल-डीज़ल में 2 रुपए प्रति लीटर की राहत दी थी.
वहीं चुनावी राज्य राजस्थान में भी वसुंधरा राजे की
सरकार ने 4 फीसदी वैट घटा दिया था. गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
लगातार क्रूड ऑयल के दामों में बढ़ोतरी हो रही है यही कारण है कि देश भी
में दाम बढ़ रहे हैं.
जल पर राहत दे
सकती है तो केंद्र सरकार भी दे सकती है.
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. आप
पीएम मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनने के बाद के कई किस्से जानते
होंगे, लेकिन उनके सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने से पहले के कई ऐसे
किस्से भी हैं, जो बहुत कम लोग जानते हैं. उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके
जीवन की कुछ ऐसी बातें, जिनसे बहुत लोग अनजान हैं...दो साल घर से रहे बाहर- जिस उम्र में युवा अपने भविष्य की चिंता करते हैं,
उस वक्त 17 साल की उम्र में उन्होंने एक असाधारण निर्णय लिया, जिसने उनका
जीवन बदल दिया. उन्होंने घर छोड़ने और देश भर में भ्रमण करने का निर्णय कर
लिया. घर से बाहर रहने के दौरान उन्होंने हिमालय (जहां वे गुरूदाचट्टी में
ठहरे), पश्चिम बंगाल में रामकृष्ण आश्रम और पूर्वोत्तर भारत की यात्रा की.
मोदी दो साल के बाद वापस लौट आए, लेकिन घर पर केवल दो सप्ताह ही रुके और वापस चले गए. चाय की दुकान में काम करने के बाद आरएसएस बैठक में जाते थे- वे कम उम्र में
ही आरएसएस से जुड़ गए थे और आरएसएस. से उनका पहला परिचय आठ साल की कम उम्र
में हुआ, जब वह अपनी चाय की दुकान पर दिन भर काम करने के बाद आरएसएस के
युवाओं की स्थानीय बैठक में भाग लिया करते थे. अपनी इस पृष्ठभूमि के साथ,
करीब 20 साल की उम्र में वे गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद पहुंच गए और
आरएसएस के नियमित सदस्य बन गए और उनके समर्पण और संगठन कौशल ने लोगों को
प्रभावित किया. स्कूटर से वरिष्ठ कार्यकर्ता को बचाया- नरेंद्र मोदी आपातकाल विरोधी आंदोलन
के मूल में थे. वे आपातकाल के दौरान गठित की गई गुजरात लोक संघर्ष समिति
(जीएलएसएस) के एक सदस्य थे. कालांतर में वे इस समिति के महासचिव बन गए, जिसके
तौर पर उनकी प्राथमिक भूमिका राज्य भर में कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की थी. आपातकाल के दौरान मोदी ने बहुत काम किया. इस बार वे एक स्कूटर पर सवार होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता को एक सुरक्षित घर में ले गए थे. पुलिस के सामने निकाल लिए कागज- इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तारियों का दौर चल रहा था और उस वक्त कुछ महत्वपूर्ण कागजात गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं से प्राप्त करने थे. उस दौरान यह जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी को सौंपी गई कि वे किसी भी तरह उन कागजात को पुलिस थाने में पुलिस की हिरासत में बैठे उस नेता से लेकर आएं और वह भी पुलिस बल के सामने. जब नानाजी देशमुख को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब उनके पास एक पुस्तक थी जिसमें उनसे सहानुभूति रखने वालों के पते लिखे हुए थे. नरेन्द्र मोदी ने उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रबंध कर दिया कि उनमें से किसी को भी पुलिस बल गिरफ्तार नहीं कर पाए.जब साधना करने थे मोदी- नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले साधक के रूप में जीवन व्यतीत किया था. स्वामी चिदानंद के अनुसार एक बार पीएम मोदी ऋषिकेश स्थित परमार्थ आश्रम आए थे और 10-12 दिन साधनारत रहे. उस दौरान वे सुबह उठते और पद यात्रा करने के बाद पूरे दिन साधना में लीन रहते थे. उन्होंने वहां प्राकृतिक चिकित्सा ली और उसे सीखी भी. उन्होंने बताया कि वो संन्यासी बनना चाहते थे. वकील से मिली थी शिक्षा- मोदी को आरएसएस के जादू और वकील साहब उर्फ लक्ष्मणराव इनामदार की ट्रेनिंग ने उनको यहां तक पहुंचने में खूब मदद की. राधेकृष्ण और हरि गोविंद की किताब 'नरेंद्र मोदी : द ग्लोबल लीडर' के मुताबिक नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के विकास में सबसे अहम योगदान आरएसएस के प्रचारक मराठी भाषी ब्राह्मण लक्ष्मणराव इनामदार उर्फ वकील साहब ने निभाया. कहा जाता है कि वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को तपस्वी जीवन की बारीकियां और खूबियां सिखाई, जो तबसे लेकर आज तक हर कदम पर उनके काम आ रही है. इसलिए मोदी को वकील साहब का मानस पुत्र भी कहा जाता है.
तौर पर उनकी प्राथमिक भूमिका राज्य भर में कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की थी. आपातकाल के दौरान मोदी ने बहुत काम किया. इस बार वे एक स्कूटर पर सवार होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता को एक सुरक्षित घर में ले गए थे. पुलिस के सामने निकाल लिए कागज- इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तारियों का दौर चल रहा था और उस वक्त कुछ महत्वपूर्ण कागजात गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं से प्राप्त करने थे. उस दौरान यह जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी को सौंपी गई कि वे किसी भी तरह उन कागजात को पुलिस थाने में पुलिस की हिरासत में बैठे उस नेता से लेकर आएं और वह भी पुलिस बल के सामने. जब नानाजी देशमुख को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब उनके पास एक पुस्तक थी जिसमें उनसे सहानुभूति रखने वालों के पते लिखे हुए थे. नरेन्द्र मोदी ने उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रबंध कर दिया कि उनमें से किसी को भी पुलिस बल गिरफ्तार नहीं कर पाए.जब साधना करने थे मोदी- नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले साधक के रूप में जीवन व्यतीत किया था. स्वामी चिदानंद के अनुसार एक बार पीएम मोदी ऋषिकेश स्थित परमार्थ आश्रम आए थे और 10-12 दिन साधनारत रहे. उस दौरान वे सुबह उठते और पद यात्रा करने के बाद पूरे दिन साधना में लीन रहते थे. उन्होंने वहां प्राकृतिक चिकित्सा ली और उसे सीखी भी. उन्होंने बताया कि वो संन्यासी बनना चाहते थे. वकील से मिली थी शिक्षा- मोदी को आरएसएस के जादू और वकील साहब उर्फ लक्ष्मणराव इनामदार की ट्रेनिंग ने उनको यहां तक पहुंचने में खूब मदद की. राधेकृष्ण और हरि गोविंद की किताब 'नरेंद्र मोदी : द ग्लोबल लीडर' के मुताबिक नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के विकास में सबसे अहम योगदान आरएसएस के प्रचारक मराठी भाषी ब्राह्मण लक्ष्मणराव इनामदार उर्फ वकील साहब ने निभाया. कहा जाता है कि वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को तपस्वी जीवन की बारीकियां और खूबियां सिखाई, जो तबसे लेकर आज तक हर कदम पर उनके काम आ रही है. इसलिए मोदी को वकील साहब का मानस पुत्र भी कहा जाता है.
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